Teacher role in improving self esteem of students in Hindi

विद्यार्थी के आत्म सम्मान में सुधार करने में शिक्षक की भूमिका (Teacher role in improving Self-Esteem of student’s)

विद्यार्थी के आत्म सम्मान में सुधार करने में शिक्षक की भूमिका (Teacher role in improving Self-Esteem of student’s)

आज हम बात करने जा रहे है विद्यार्थी जीवन के बारे में।विद्यार्थी जीवन में एक शिक्षक किस तरह से अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है । कैसे विद्यार्थी के आत्म-सम्मान को बनाए रखने में मदद करते हैं ?विद्यार्थी जीवन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस समय विद्यार्थी जो कुछ भी सीखता है और समझता है उसका असर उसके जीवनभर के समय तक रहता है। आजकल के समय में हर चीज़ में प्रतियोगिता इतनी ज्यादा है कि एक विद्यार्थी अपने आप को कमजोर महसूस करता है और उसका आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ने लगता है।

Teacher role in improving self esteem of students in Hindi
Teacher role in improving self esteem of students in Hindi

आज के समय में स्कूल और कॉलेज हर जगह ग्रेड सिस्टम चल रहा है ,जो विद्यार्थी A ग्रेड लेता है उसे होशियार माना जाता है और जो विद्यार्थी C ग्रेड या उससे कम ग्रेड लेता हैं उन विद्यार्थियों को पढ़ाई में कमजोर माना जाता है । इस तरह से विद्यार्थी का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है और धीरे-धीरे उसका अपने शिक्षक, दोस्तों , माता-पिता इत्यादि के साथ संबंध खराब होने लगता है। कई बार शिक्षक का गलत रवैया भी विद्यार्थी के जीवन को बहुत ज्यादा प्रभावित कर सकता है।

एक शिक्षक चाहे तो एक विद्यार्थी के आत्म-विश्वास को बढ़ा भी सकता है और चाहे तो उसके आत्म-विश्वास को तोड़ भी सकता है। यह निर्भर करता है सिर्फ और सिर्फ एक शिक्षक पर एक विद्यार्थी किसी भी काम में अपना अच्छा प्रदर्शन तभी दे सकता है जब उसके अंदर किसी भी प्रकार का डर न हो और उस विद्यार्थी में आत्मविश्वास हो कि मैं यह काम अच्छे से कर सकता हूँ । एक अच्छा शिक्षक वही होता है जो अपने सबसे कमजोर विद्यार्थी का हाथ कभी नहीं छोड़ता । शिक्षक ही अपने छात्रों का मनोबल बढ़ा सकता है और उसे जीवन में सफल बना सकता है। इस तरह से हम यह कह सकते है कि विद्यार्थी जीवन में शिक्षक और माता-पिता दोनों ही अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

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विद्यार्थी के आत्मसम्मान को बढ़ाने में कैसे एक शिक्षक मदद कर सकते है

1. सकारात्मक बातों पर ध्यान दें

इंसान का स्वभात है कि वह ना चाह कर भी नकारात्मक चीजों पर पर ध्यान देता हैं । इसी तरह से विद्यार्थी का ध्यान भी सकारात्मक चीजों से ज्यादा नकारात्मक चीजों में रहता है। विद्यार्थी भी अपने अंदर की कमजोरियों को अच्छे से जानता है फिर भी वह अपने अंदर की ताकत के बारे में जानने की कभी कोशिश नहीं करता है। एक शिक्षक अपने विद्यार्थी को आत्म मूल्यांकन के लिए प्रेरित कर सकते है। आत्म मूल्यांकन से विद्यार्थी खुद के बारे में जान सकता है कि वह कौन है? उसके अंदर क्या हुनर है? कैसे वह जीवन में सफल हो सकता है ? धीरे-धीरे उसका ध्यान सकारात्मक बातों पर जाने लगेगा। उसके अंदर एक आत्मविश्वास जन्म लेगा जो उससे कुछ भी करवा सकता है और इस तरह से वह जीवन में सफलता का मार्ग अपना सकता है।

2. रचनात्मक आलोचना दे

विद्यार्थी जीवन मे रचनात्मक चीजो का बहुत ही ज्यादा महत्व है। रचनात्मक चीजे ही विद्यार्थी के हुनर को बाहर निकालने में मदद करती है। एक शिक्षक ही विद्यार्थी की रचनात्मक आलोचना कर सकता है । कुछ विद्यार्थी इतने कमज़ोर होते हैं कि भले ही कोई उनकी मदद कर रहा हो फिर भी वह कुछ नहीं कर पाते | वह अंदर से बहुत ही संवेदनशील होते है। एक विद्यार्थी रचनात्मक आलोचना तभी कर सकता है जब वह अपने शिक्षक से लगाव और प्यार महसूस करता है। एक शिक्षक को सर्वप्रथम अपने विद्यार्थी के सामने एक अच्छी छवि बनानी पड़ती है ताकि वह विद्यार्थी अपने गुरु को और अच्छे से समझ सके । माता- पिता और शिक्षक दोनों ही बच्चों के आत्म सम्मान को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

3. यथार्थवादी उम्मीदें कायम करें

सबसे पहले विद्यार्थी को यथार्थवादी चीज़ों से अवगत करवाए । उनको जीवन में सफलता का मार्ग दिखाए । विद्यार्थी को उनकी ताकत और कमजोरियों से अवगत करवाए । जब आपको लगे कि विद्यार्थी अब किसी भी चुनौती के लिए
तैयार है तो उसके सामने एक चुनौती रख दें। और यह देखने का प्रयास करें कि वह विद्यार्थी किस तरह से उस चुनौती का सामना करता है और उस चुनौती को पार करने के बाद वह कैसा महसूस करता है।उस चुनौती को पार करने के बाद विद्यार्थी आत्म सम्मान से भरा हुआ महसूस करेगा और जीवन में आने वाली हर चुनौती के लिए तैयार रहेगा।

4. गलतियों से सीख ले

जब कोई विद्यार्थी किसी चुनौती में असफल होता है तब एक शिक्षक ही उसका सही मार्गदर्शन कर सकता है। शिक्षक ही उसे बता सकता कि जीवन में असफलता भी हमे बहुत कुछ सीखाती है। हमें अपने जीवन की गलतियों से कोई न कोई सीख अवश्य लेनी चाहिए । जीवन में जितने भी सफल व्यक्ति है पहले उन्होंने हार का मुंह देखा और उन गलतियों से कुछ न कुछ जरूर सीखा । तभी आज वह जीवन में इतने ज्यादा सफल है।

Teacher role in improving self esteem of students in Hindi
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निष्कर्ष
इस तरह से हम यह कह सकते हैं विद्यार्थी के आत्म-सम्मान को बढ़ाने में एक शिक्षक का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। शिक्षक ही एक विद्यार्थी को जीवन में सफल बना सकता है। एक अच्छा शिक्षक वहीं है जो अपने कमजोर विद्यार्थी का हाथ अंतिम समय तक भी थामकर रखता है। शिक्षक ही एक विद्यार्थी का मनोबल बढ़ा सकता है और उसके अंदर के हुनर को जानने में विद्यार्थी की मदद कर सकता है।

एक अच्छा शिक्षक ही विद्यार्थी को अंधेरे से उजाले की तरफ लेकर जाता है। घर के बाद स्कूल ही एक बच्चे का दूसरा घर होता है और दूसरे घर में एक शिक्षक उस बच्चे की माता-पिता की तरह प्यार करते है और उसको जीवन का अमूल्य ज्ञान देते हैं । एक शिक्षक ही बच्चे को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करते है कि कैसे हम इन चुनौतियों का डटकर सामना कर सकते हैं। इस तरह से हम यह कह सकते हैं कि विद्यार्थी जीवन में शिक्षक का योगदान बहुत ही ज्यादा सहाहनीय है ।

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