राजस्थानी कहावतें | rajasthani proverbs in hindi

राजस्थानी भाषा की रोचक कहावतों का हिंदी अनुवाद यंहा दिया जा रहा हैं। कहावतें अथवा लोकोक्तियाँ विश्व की हर भाषा में पायी जाती हैं। कहावते भाषा का श्रृंगार हैं। इनके प्रयोग से भाषा में संजीवता और स्फूर्ति का संचार हो जाता हैं।

कहावतें
राजस्थानी कहावतें

राजस्थानी कहावतें

  1. अंधाधुंध की साहबी,घटाटोप को राज। अर्थात जंहा शासक अंधाधुंध शासन करते हैं वँहा अंधकार का साम्राज्य होता हैं।
  2. अक्कल बिना ऊंट उरभाना फिरे।अर्थात मुर्ख व्यक्ति बुद्धि नहीं होने के कारण साधनों का प्रयोग नहीं कर पाते।
  3. अगम बुद्धि बाणियो, पिछम बुद्धि जाट।तुंरत बुद्धि तुर्कड़ो, बामण सम्पट पाट। अर्थात बनिया दूरदर्शी होता हैं,जाट को बाद में समझ आता है,मुसलमान तुरन्त ताड़ लेता हैं,ब्राह्मणों का बुद्धि के मामले में सब साफ़ होता हैं।
  4. अग्रे अग्रे ब्राह्मणा, नदी नाला बर्जनते।अर्थात ब्राह्मण सब कार्यों में आगे रहता हैं परंतु नदी नाला अर्थात संकट आने पर दूर हो जाता हैं।
  5. अनियो नाचे अनियो कूदे अनियो तोड़े तान। अर्थात पेट में अन्न जाने पर ही नाच कूद और राग रंग सूझते हैं।
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राजस्थानी कहावतें
  1. अणमिले का सै जती हैं। अर्थात अगर भोग करने का मौका ना मिले तो ब्रह्मचर्य का पालन स्वत: हो जाता हैं।
  2. अभागियो टाबर त्यौहार नूं रुसे।अर्थात अभागा बच्चा त्यौहार के दिन रूठता हैं और मिठाई कपड़ों से वंचित रहता हैं।
  3. असलेखा बूठा, बैदा घरे बधावणा। अर्थात यदि अश्लेषा नक्षत्र में वर्षा हो तो रोग खूब होगा,डॉक्टर वैद के घर बधाई बंटे।
  4. आँख गयी संसार गयो,कान गया हंकार गयो।अर्थात आँख से ही संसार हैं और कान से ही अहंकार है,बधिर को न सुनने के कारण अहंकार नहीं होता।
  5. आँधा की गफ्फी, बहरा को बटको, राम छुड़ावै तो ही छूटे नहीं तो सिर ही पटको। अर्थात अंधे के हाथों की पकड़ और बहरे का बटका(चूंटी काटना) परमात्मा ही छुड़ावै तो छूटता हैं।अँधा गिरने के डर से नहीं छोड़ता और बहरे को सामने वाले का दर्द सुनाई नहीं देता। शेष अगली बार….

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