kisi pe depend mat raho | जिंदगी में दूसरों पर निर्भर ना रहें


kisi pe depend mat raho कभी कभी हमारे दिमाग में ख्याल आता है कि जिंदगी क्या है? हमारी जिंदगी का लक्ष्य क्या है? हमारे दिमाग में बहुत सारे सवाल है परन्तु उसका जवाब मिलना बहुत मुश्किल है। हर कोई जिंदगी को अलग अलग नजरिए से देखते हैं कोई कहता है जीवन एक यात्रा है, कोई कहता है जीवन एक खेल है, कोई कहता है जीवन एक दौड़ है और अगर हम इस दौड़ पीछे रह गए तो कोई हमसे आगे निकल जाएगा। आज हम बात करने जा रहे हैं कि हम अपनी जिंदगी को कैसे जी सकते है, कैसे खुद पर निर्भर हो सकते है और कैसे अपनी जिंदगी को औरों से बेहतर बना सकते हैं।
जिंदगी में किसी पर इस कदर निर्भर ना रहो कि आपका खुद का अस्तित्व ही खत्म हो जाए । हर इंसान को अपनी एक अलग पहचान बनानी चाहिए क्योंकि बिना पहचान के इंसान का इस दुनिया में कोई अस्तित्व नहीं है।

kisi pe depend mat raho
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1. अपने अंदर की कमी और ताकत को जाने

हर इंसान में कोई न कोई कमी जरूर होती है और साथ में कोई न कोई ताकत भी होती हैं। सबसे पहले वह अपने अंदर की कमजोरी को दूर करे और उसमे सुधार करे। और अपने अंदर जो strengh (ताकत) हैं उसका सही जगह इस्तेमाल करें।
जब हमें पता होगा हमारी कमजोरी क्या है? और कैसे हम इसे दूर कर सकते हैं तो इससे जीवन का तालमेल(balance) सही हो जाता है। हमें फिर जिंदगी की मुश्किलें आसान लगने लगती है।

2. असफल होने से न डरे


अगर आपको जिंदगी में आगे बढ़ना हैं और दूसरों से हट कर कुछ करना हैं तो सबसे पहले अपने दिल और दिमाग से असफल होने का डर निकाल दे। क्योंकि यह डर हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी है जो हमे जिंदगी में सबसे पीछे छोड़ सकती हैं। हमें यह नहीं सोचना कि अगर हम इस काम मे असफल हो गए तो लोग क्या कहेंगे या फ़िर हमने जो मेहनत की है वो खराब हो गई। अगर हम असफल होते भी है तो हमे इस असफलता से एक नई सीख लेनी चाहिए और उस गलती को दोहराना नहीं चाहिए।


इंसान अपनी गलती और असफलता से ही जिंदगी की सीख लेता है। जो ज्ञान हमें किताबों से नहीं मिलता वह हमें जिंदगी के सफ़र से मिल जाता है। इंसान का स्वभाव है गलती करना और अगर वह अपनी गलतियों से सीख ना ले तो वह सबसे बड़ी गलती है।इंसान को यह कोशिश करना चाहिए कि वह अपने जीवन की असफलता से कोई ना कोई सीख अवश्य ले और जो सीख हमें जिंदगी से मिलता है वह हमें किताबों से भी नहीं मिल सकता।

3. खुद को दूसरों से तुलना ना करें


हर इंसान की एक बहुत बड़ी कमी होती है कि वह खुद को बाकी लोगों से तुलना करता है। अगर हमें जिंदगी में आगे बढ़ना है तो यह गलती ना दोहराए क्योंकि आप की अंदर की प्रतिभा(skill) को सिर्फ आप जानते हैं और कोई नहीं जानता। भगवान भी हर इंसान में कोई ना कोई कौशल(skill) देता है, बस जरूरत है उसे जानने की और समझने की । जरूरी नहीं है कि हर इंसान में एक जैसा कौशल हो। भगवान ने बहुत खास चीज बनाई है वह है इंसान और हर इंसान में कुछ ना कुछ खास जरूर है बस खुद को दूसरों से तुलना ना करें।


खुद को दूसरों से तुलना करने से अच्छा है कि आप अपने अंदर के कौशल(skill) को बाहर निकालें और विचार कीजिए कि आप औरों से बेहतर कैसे हैं? ऐसी कौन सी चीज है जो आपको औरों से अलग करती है? रोज सुबह उठकर योगा और ध्यान कीजिए ।खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तंदुरुस्त रखिए क्योंकि जब हमारा शरीर तंदुरुस्त होगा तो हम मानसिक रूप से भी तंदुरुस्त होंगे।

4. सकारात्मक वातावरण ( positive environment) में रहिए


एक अच्छी सोच के लिए हमारे आसपास का माहौल भी अच्छा होना चाहिए। जब हम मानसिक (mentally)रूप से अच्छे होंगे तो हमारा दिमाग भी सकारात्मक(positive) रहेगा सकारात्मक सोच से ही जिंदगी जीने का मजा आता है और हम अपने जीवन की सभी समस्याओं का हल कर सकते हैं।

5. काम को समय पर करें


कोई भी काम करने से पहले एक समय निर्धारित कर ले। मैंने इस काम को निर्धारित समय तक या फिर उससे पहले पहले खत्म करना है। काम को समय पर करने से हम अपने समय को बचा सकते हैं और खुद को औरों से अलग बना सकते हैं।
कहते हैं कि बीता हुआ समय वापस नहीं लाया जा सकता पर हम समय से पूर्व काम खत्म करके अपने जीवन के मूल्यवान समय को अवश्य बचा सकते हैं।

Conclusion (निष्कर्ष)
दोस्तों जब जिंदगी हमारी है तो इसकी चाबी हम दूसरों को क्यों दे। जिंदगी में अगर खुश रहना है और औरों से अलग दिखना है तो सकारात्मक ( positive) रहो , काम को निर्धारित समय से पहले करें , अपने अंदर की प्रतिभा (skill) को जाने और इस पर काम करें। जिंदगी की गाड़ी की driver हम खुद है और इसे किस दिशा में लेकर जाना है इसका निर्णय हमने खुद करना है।
भगवान ने हमें जीवन दिया ताकि हम इसे अच्छे से जिए।

चल जिंदगी नई शुरुआत करते हैं
जो उम्मीद और उसे की थी
वह अब खुद से करते हैं।

हमें जिंदगी को जीना है ना कि जिंदगी को काटना है। सुख और दुख एक ही सिक्के के दो पहलू है। अगर जीवन में सिर्फ सुख हो तो हमें दुख का मतलब नहीं पता चलता और अगर जीवन में सिर्फ दुख हो तो हम जीवन के हालातों से इतने मजबूत हो जाते हैं कि हमें खुद पता नहीं चलता। अगर जीवन में खुश रहना है तो हर मुसीबत का सामना करने के लिए हमेशा तत्पर रहें , अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें और अपने काम को समय से पहले खत्म करे ।अगर आप समय से पहले काम खत्म करते हैं तो इससे आपको मानसिक शांति मिलती है और जीवन जीना और आसान हो जाते हैं।


इस तरह से हम अपने जीवन को आसान और सरल बना सकते हैं । जब हमारा जीवन सरल हो जाता है तो हम आत्मनिर्भर हो जाते हैं और हमारी एक अपनी पहचान होती है । इस तरह से हम दूसरों पर निर्भर नहीं रहते ।

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