Bhutiya kahani | भूतियाँ कहानी 2022

भूतियाँ कहानी (Bhutiya kahani) दोस्तों आज हम आपको सुनाने जा रहे है भूतों की कहानी | इस कहानी को हम ” भूतों का हास्पिटल ” भी कह सकते है । कहानी थोड़ी डरावनी है पर आप डरना मत क्योंकि इस कहानी को सुनने के बाद आपको बहुत मजा आएगा चलिए अब हम कहानी की तरफ आगे बढ़ते है।

Bhutiya kahani
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Bhutiya kahani (भूतियाँ कहानी)

वासेपुर जाने वाले सड़क के पास एक हॉस्पिटल है और यह हॉस्पिटल जंगल के बीचों-बीच में है। इस सड़क को भूतिया सड़क कहा जाता है और इस हॉस्पिटल को 4 बजे से पहले पहले खाली कर जाता है क्योंकि यहाँ पर भूतों का बसेरा है। एक बार कॉलेज का एक ग्रुप घूमने के लिए यहाँ पर आते हैं जिसमें से विकास और प्रेरणा रास्ता भटक जाते है। प्रेरणा डरते हुए विकास से कहती हैं- हमारे बाकी दोस्त कहाँ होंगे ? हम कब तक इस बाइक पर घूमते रहेंगे वो भी इतनी रात में और इस सुनसान जंगल में, यहाँ पर कोई जंगली जानवर हम पर हमला भी कर सकता है “। विकास हंसते हुए कहता हैं तुम लडकियां भी कितनी डरती हो और जानवर का तो मुझे पता नहीं लेकिन तुम मेरा दिमाग जरूर खा जाओगी। इसके बाद प्रेरणा कुछ कहती बाइक का संतुलन अचानक से बिगड़ जाता है और उनकी बाइक एक पेड़ से टकरा जाती है। दोनों जमीन पर गिर जाते हैं और उनको गहरी चोट लगती है। फिर दोनों को सामने एक बोर्ड दिखता है वो भी सरकारी हॉस्पिटल का वो दोनो यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि इतने सुनसान जंगल में यह हॉस्पिटल ।

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फिर उनके पास इतना समय नहीं होता कि वो इस हॉस्पिटल के बारे में ज्यादा सोचे । प्रेरणा को गहरी चोट लगी होती है जिस वजह वह बेहोश हो जाती है जिससे कि विकास उसकी मदद करता है और उसे गोद में उठाकर हॉस्पिटल ले जाता है। जैसे ही वह हॉस्पिटल में पहुँचता है डॉक्टर पहले से ही हॉस्पिटल के गेट के बाहर उसका इंतजार कर रहा होता है। विकास को यह सब देखकर बहुत अजीब लगता है फिर भी वह घबराते हुए डॉक्टर को कहता है हमारा एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया है और प्रेरणा इसी बीच बेहोस हो गई।प्लीज इसको बचा लीजिए।

डॉक्टर उन दोनों को इमरजेंसी वार्ड में दाखिल करता है और वही पर उन दोनों का ईलाज करने लगता है। विकास को वो हॉस्पिटल बहुत अजीब लगता है लेकिन प्रेरणा की ऐसी हालत देखकर वह कुछ कह नही पाता । डॉक्टर हाथों से इशारा करते हुए नर्स को कुछ लाने के लिए कहता है। नर्स अपने हाथों में एक खून से सना हुआ चाकू और कुछ मांस के टुकड़े लेकर आती है जिसे देखकर विकास बहुत ज्यादा घबरा जाता है। इससे पहले कि विकास कुछ कहता डॉक्टर उसे इंजेक्शन लगा देता है जिससे कि वह बेहोश हो जाता है। कुछ घंटों के बाद प्रेरणा को अचानक से होश आता है और उसे कोई गंदी सी बदबू आती है जैसे ही वह अपने चारों तरफ देखती है तो उसकी जोर से चीख निकल जाती है क्योंकि वो दोनो कहीं और नहीं बल्कि एक मुर्दाघर में थे। प्रेरणा की चीख सुनकर विकास भी उठ जाता है वो दोनों एक पोस्ट मार्टम रूम में होते ।

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जैसे ही वह दोनों भागने के लिए दरवाजे की ओर जाते हैं दरवाजा अपने आप बंद हो जाता है और वो डॉक्टर अचानक से वहाँ प्रकट हो जाता है और देखते ही देखते वह एक भयानक चेहरे में बदल जाता है इसी के साथ-साथ वहाँ पर बहुत सारे भूत अचानक से प्रकट हो जाते हैं। विकास और प्रेरणा बहुत ज्यादा डर जाते है और उन भूतों से कहते है प्लीज हमें जाने दो, हमें मत मारो। उन दोनों की बातें सुनकर भूत बहुत जोर-जोर से हंसने लगते हैं और उन दोनों की आंखें निकाल लेते है ताकि वो दोनो भागने की कोशिश ना करें। आंखें निकालने के बाद विकास और प्रेरणा वहीं पर तड़प- तड़प के मर जाते हैं।

अगली सुबह जब हॉस्पिटल का स्टाफ वहां पहुंचा तो रिसेप्शन पर विकास और प्रेरणा की लाश को देखकर बहुत ज्यादा डर जाते है और उसमें से एक लेडी डॉक्टर करिश्मा वहाँ से भागकर चली जाती है और उसी के पीछे-पीछे डॉक्टर शिवम जाते हैं और कहते हैं घबराओ मत करिश्मा यहाँ पर रोज लाशों का होना आम बात है तुम यहाँ पर नई-नई आई हो इसीलिए तुम्हें कुछ पता नहीं हैं। करिश्मा घबराते हुए पूछती है यह लाशे कहाँ से आती है? इनकी हत्या कौन करता है? इस हॉस्पिटल में ऐसा क्यों होता है? शिवम बताता है कि पहले यह एक प्राइवेट हॉस्पिटल था लेकिन बाद में सरकार ने इसे सरकारी हॉस्पिटल घोषित कर दिया।

पहले इस हॉस्पिटल के तीन मालिक थे जिनको भूतों ने मार दिया क्योंकि हॉस्पिटल के मालिक हॉस्पिटल का जंगल में होने का फायदा उठाते थे। वह रात में इस जंगल से होकर निकलने वाले लोगों का एक्सीडेंट करवाते थे और बाद में खुद ही एम्बुलेंस भेजकर हॉस्पिटल के मुर्दाघर में लाते थे और उनकी किडनी निकाल कर उनको मरने के लिए छोड़ देते थे। और एक दिन तो इन लोगों ने अपनी सारी हदें पार कर दी थी उन्होंने एक बस का एक्सीडेंट करवा दिया जिसमें बहुत से लोग घायल हो गए थे।उन लोगों को भी इस मुर्दाघर में लाकर मार दिया गया उस दिन के बाद यह हॉस्पिटल एक मुर्दाघर में बदल गया।

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भूत बनने के बाद सबसे पहले उन्होंने इस हॉस्पिटल के मालिकों को मारा और उस दिन के बाद से इस हॉस्पिटल में लाशों का सिलसिला चलता आ रहा है। करिश्मा ने बड़ी हैरानी से पूछा क्या सच में इस हॉस्पिटल में ऐसे गलत काम होते थे ? और अभी तक इन भूतों को मुक्ति क्यों नहीं मिली ? क्या आपने कोई उपाय नहीं किया ?

डॉक्टर शिवम ने बताया कि हमने एक सिद्ध तांत्रिक को भी बुलाया था लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि उन भूतों ने तांत्रिक तक को नहीं छोड़ा । अब अपनी और औरों की जान बचाने के लिए बस एक ही उपाय है कि इस हॉस्पिटल को 4:00 बजे से पहले पहले खाली कर दो। और उस दिन के बाद से अब तक उस हॉस्पिटल में लाशों का सिलसिला चला आ रहा है । जाने उन आत्माओं को शांति कब मिलेगी ?

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