2022 bhoot ki kahani darawni hindi mein | भूत की कहानी

भूत की कहानी (bhoot ki kahani darawni hindi mein) वैसे तो भूत की कहानी कोई कहानी नहीं होती यह हम में से किसी एक की आप बीती होती है जैसे कई बार हम जब कहीं बाहर घूमने जाते हैं तो वहीं का कोई किस्सा हमसे जुड़ जाता है अगर यह किस्सा खुशनुमा है तो यह याद बन जाता है लेकिन अगर यह कोई डरावना किस्सा है तो यह घटना बन जाती है जिसे हम भूत की कहानी भी कह सकते हैं। ऐसा ही एक किस्सा मुझे याद है जो एक बार जब मैं अपनी दादी के साथ गांव गई थी तब हुआ था ।एक बार कुछ औरतें जंगल में लकड़ी लेने गई थी, शाम का समय था और जोरदार बारिश हो रही थी।

वह औरतें अपने घर के लिए लकड़ी इकट्ठा कर रही थी क्योंकि पूरे बरसात में वह लोग जंगल नहीं जाते थे। जंगल में यह अफवाह फैली हुई थी कि जंगल में ऐसी कोई चीज है जो इंसान और जानवर सब पर हमला कर रही हैं इसलिए गांव की औरतें जल्दी-जल्दी लकड़ियां इकट्ठा करने लगी । शाम का समय होने लगा था इसलिए थोड़ा अंधेरा भी हो गया था। बारिश और जोर से होने लगी तभी अचानक से बिजली कड़की और एक पेड़ की टहनी नीचे गिरी जिसकी वजह से औरतें डर गई और इधर उधर भागने लगी ।तभी अचानक उनमें से एक औरत का पैर फिसल गया और वह गिर गई । सभी औरतें डर के मारें इधर-उधर भागने लगी और उनमें से कुछ पेड़ के पीछे छुप गई ।

तभी अचानक कुछ पत्तों की सरसराहट सी हुई और अंधेरा ज्यादा होने लगा था तो कुछ साफ दिखाई भी नहीं दिया ।भागने के कारण उनमें से एक महिला का पैर अचानक फिसला और वह नीचे गिर गई। उस महिला को लगा जैसे किसी ने उसका एक पैर पकड़कर खींच लिया हो और कोई चीज उसे नीचे की दिशा में ले जा रही है। बाकी सभी औरतें डरकर चीखने लगी और उन औरतों को चीखता देख वह चीज और जोर-जोर से दहाड़ने लगी जिससे गांव की औरतें घबराकर भागने लगी उस औरत ने हिम्मत जो नीचे गिर गई थी उसका नाम प्रिया था।

Bhoot ki kahani darawni hindi mein

प्रिया घबराई नही बल्कि अपनी जान बचाने की पूरी कोशिश करती रहीं तभी अचानक से उसके हाथ रस्ते में पड़ी एक कुल्हाड़ी पर पड़ी और उसने उसे उठा लिया और उसने मौका मिलते ही उस अनजान चीज पर बहुत जोर से हमला कर दिया जिससे वह दर्द से चिल्लाने लगी। देखने में थोड़ा बहुत बाघ जैसा लग रहा था पर अंधेरा ज्यादा होने की वजह से कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था। सबका कहना था

उसकी आत्मा आज भी बरसात के मौसम में इसी जंगल में घूमती हैं क्योंकि वह बाघ अपने परिवार से बिछड़ गया था और एक जंगलात द्वारा मारा गया था पर आज भी वह कभी कभी दिखाई देता है ।प्रिया के वार के बाद बाघ थोड़ा दूर हटा पर उसने फिर से प्रिया को पकड़ा और जोरदार हमला करने की कोशिश की लेकिन इस बार प्रिया ने और जोर से हमला किया जिससे वह दूर जा गिरा और भाग गया। फिर अचानक से वह गायब हो गया और किसी को भी दिखाई नहीं दिया ।

प्रिया ने थोड़ा सा होश संभाला तभी वहा पर गांव की औरते भी आ गई थी उन्होंने प्रिया से पूछा वह कैसी है पर प्रिया के पैर में थोड़ी सी चोट लगी हुई थी जिसकी वजह से उसने कोई जवाब नही दिया। तभी गांव के बाकी लोग वहां पहुंचे उन्होंने प्रिया को अस्पताल पहुंचाया ।कुछ दिनों बाद प्रिया ठीक हो गई थी पर वह उस घटना को भूल नहीं पाई ।

गांव की औरतों का कहना था वह बाघ दोबारा भी आ सकता है क्योंकि उसने एक बार प्रिया को पकड़ा है और हमले के दौरान उसने प्रिया का खून चख लिया इसीलिए अपने शिकार की तलाश में दोबारा भी आ सकता है। इससे प्रिया और ज्यादा घबरा गई और उसने घर से बाहर जाना भी बंद कर दिया यहां तक कि वह जंगल की तरफ देखती भी नहीं थी। प्रिया अब घर में भी अकेली नहीं रहती थी उसे हर पल वह घटना याद आती थी, अगर हल्की सी आहट भी होती तो वह डर जाती है वह आसपास के किसी कुत्ते को भी देख कर घबरा जाती थी और अपने आप को कमरे में छुपा लेती।

इस तरह हर वक्त वह डरी सहमी सी रहती थी, उसको घरवालों को उसकी चिंता होने लगी और गांव का माहौल भी इस घटना के बाद एकदम बदल चुका था । अब जंगल में जाना तो दूर की बात है कोई भी शाम होने के बाद घर से बाहर नहीं जाता था। तभी गांव के एक बूढ़े बाबा ने कहा ऐसे तो बाकी जानवर क्या खाएंगे ? हम लोग लकड़ी कहां से इकट्ठा करेंगे ?हमें समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए और फिर उन लोगों ने विचार-विमर्श कर यह निष्कर्ष निकाला कि उन्हें उस बाघ को आत्मा को मुक्ति देनी पड़ेगी अन्यथा गांव का विनाश हो जाएगा ।

भूत वाली कहानी

जांच पड़ताल के बाद पता चला कि उस बाघ का परिवार उसी जंगल में रहता है और आज भी अपने परिवार की तलाश में वह इधर उधर घूम रहा है दरअसल उसके दो बच्चे थे जिन्हे वह बहुत प्यार करता था और आज भी वह अपने बच्चो को ढूंढ रहा है क्योंकि उसके बच्चे इतने बड़े नहीं थे कि अपना ध्यान खुद रख सके। गांव वालों ने फिर चिड़ियाघर से किसी को बुलाया और कुछ आदमियों की सहायता से उसके बच्चों को पकड़ा और उन्हें चिड़ियाघर भेज दिया जहां उनकी अच्छे से देखरेख हो सके। और कुछ दिनों बाद गांव के कुछ पेड़ों की भी कटाई हो गई जिससे जंगल लगभग समाप्त हो गया था उस घटना के बाद किसी ने भी उस बाघ की आत्मा को वहां आसपास नहीं देखा।

कुछ दिनों के बाद लोग इस घटना को भूल भी चुके थे और अब वह लोग अपने रोजमर्रा के काम में लग गए। आज भी यह घटना वहां प्रचलित है और अब वह लोग जंगल में जाने लगे हैं पर बरसात में बहुत कम जाते हैं । प्रिया अब अपने परिवार के साथ बहुत खुश थी और अपनी जिंदगी में भी आगे बढ़ गई थी।उसके जख्म तो ठीक हो गए हैं पर उनके निशान आज भी उसके शरीर पर हैं ।इस घटना के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि जिंदगी में चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत क्यों ना आ आए हमें कभी भी डरना नहीं चाहिए और इस लड़ाई में भले ही जीतने की गुंजाइश बिल्कुल भी ना हो फिर भी हमें लड़ते रहना चाहिए।

अगर प्रिया ने हिम्मत ना की होती तो शायद आज वह जिन्दा ना होती और गांव वालों के मन में आज भी इस बात को लेकर खौफ होता । प्रिया की वजह से गांव वालों ने भी हिम्मत दिखाई और उस बाग की आत्मा को भी मुक्ति मिल गई।कई बार छोटी-छोटी घटनाओं के पीछे कोई बड़ी दुर्घटना होती है हमें कभी भी इनको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए । आज भी जब हम अपनी दादी नानी से कई बार ऐसी कहानियां सुनते है तो हमारे अंदर एक डर पैदा हो जाता है और कई बार हम इस कहानी में इतने डूब जाते है की यह कहानी हमें सच्ची लगने लगती है।

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