टेस्ला ने लगाया शाओमी पर इल्ज़ाम

1. टेस्ला ने लगाया शाओमी पर इल्ज़ाम कि इन्होंने टेस्ला बॉट का डिजाइन चुरा कर अपने साइबर वन में लगाया हैं 

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दोस्तों शाओमी ने अनवील किया है अपने नए ह्यूमनॉइड रोबोट ( Humanoid Robot ) को जिसका नाम साइबरऑन ( CyberOne ) है लेकिन इसका डिजाइन टेस्ला के बॉट जैसा ही है जिसको वह सितंबर में लॉन्च करने वाले थे अपने एक ऐड के अंदर फिलहाल के लिए उनका प्रोटोटाइप भी तैयार था। लेकिन शाओमी उसके साथ गेम खेल गया क्योंकि शाओमी ने कुछ दिन पहले ही उन्हीं की तरह दिखने वाला एक प्रोटोटाइप लॉन्च किया है । अब टेस्ला ने शाओमी पर इल्ज़ाम लगाया है कि इन्होंने टेस्ला बॉट का डिजाइन चुरा कर अपने साइबर वन में फिट किया है ।

2. क्या आप भी एक आईलैंड के मालिक बनना चाहते हैं?प्लाड्डा का स्कॉटिश द्वीप की बिक्री हो रही है वो भी सिर्फ 3 करोड़ रूपये में ।

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दोस्तों अगर आप भी सोचते है कि आपके पास भी अपना खुद का एक प्राइवेट आइलैंड होना चाहिए तो यह सपना अभी भी पूरा हो सकता है वो भी सिर्फ तीन करोड़ रूपये में।यह आइलैंड इतना ज्यादा सस्ता है कि अगर आप मुंबई के जुहू के अंदर 3 BHK का घर लेने जाओगे तो वह भी तीन करोड़ से ज्यादा एक्सपेंसिव होगा । लेकिन यह जो आइलैंड है पूरा का पूरा आपको तीन करोड़ रुपये में मिल जाएगा ।

दरअसल स्कॉटिश के अंदर प्लाड्डा द्वीप ( Isle of Pladda ) एक 28 एकड़ का द्वीप है जो कई सालों से खाली पड़ा है इसको रेनोवेट करके दुबारा से जीवित करने के लिए इसे 3 करोड़ रूपये में बेचा जा रहा है ।प्लाड्डा द्वीप, अरन के किनारे पर मौजूद है जिसमें एक पांच बेडरूम का घर है , एक हेलीपैड है और इसमें 1790 के दशक का लाइटहाउस भी शामिल है।

3. चिल्ली का रहस्यमय सिंक होल जिसका साइज धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है 

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 दोस्तों यूएस की चिल्ली के अंदर अचानक से एक सिंक होल ( Sink hole ) हुआ था जिसके बारे में आपको पता ही होगा । पहले वहां पर कैनेडियन कंपनी और जैपनीज माइनिंग कंपनी काम किया करते थे और जैपनीज़ माइनिंग कंपनी ने एक पंप लगाया था जिसके अगले दिन से ही उन्होंने देखा कि यहां एक बहुत बड़ा सिंक होल हो चुका है ।लेकिन खास बात यह है कि एक हफ्ते तक काम रोका गया उसके बाद भी इसका साइज बढ़ता जा रहा है । पहले यह 25 मीटर चौड़ा और 200 मीटर गहरा हुआ करता था लेकिन अब इसकी चौड़ाई 50 मीटर हो चुकी है । यह सिंक होल पहले अपने आप कैसे बड़ा हो रहा है किसी को भी मालूम नहीं है ।

 4. ISRO ने छात्राओं द्वारा बनाए गए सैटेलाइट के साथ एक नया रॉकेट भी लॉन्च करना था लेकिन अंतिम चरण में डाटा लॉस हो गया जिसकी वजह से यह मिशन असफल रहा 

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दोस्तों इंडिया की 750 स्कूल गर्ल्स ने एक सैटेलाइट तैयार किया था जिसको ISRO ने ऑरबिट में पहुंचाना था जिसके लिए उन्होंने अपना स्मैलेस्ट कमर्शियल रॉकेट ( Smallest Commercial Rocket ) का भी इस्तेमाल किया था । लेकिन अंतिम समय में एक सेंसर फेलियर हो गया जिसकी वजह से वो सैटेलाइट अब अनयूजेबल हो गया है क्योंकि वो गलत ऑर्बिट में पहुँच चला गया है।

5.एलोन मस्क के फादर एरोल मस्क अपने बेटे के खिलाफ़ कमेंट करके चर्चा में बने रहना चाहते है 

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दोस्तों एरोल मस्क को एक बात मालूम चल चुकी है अगर उन्हें लाइमलाइट में बने रहना है तो उसके लिए उन्हें एलोन मस्क के ऊपर कोई ना कोई कमेंट करते रहना होगा ।

हाल ही में जब ऑस्ट्रेलिया के अंदर एक इंटरव्यू हुआ था जिसमें उनसे पूछा गया था कि आपको अपने बेटे ऐलान मस्क की तरक्की के देखकर कैसा लगता है ? एरोल मस्क ने जवाब दिया था कि एलोन मस्क इतनी ज्यादा तरक्की नहीं कर रहा जितना मैंने सोचा था । इतने सालों में उसका सिर्फ पेट बाहर निकल रहा है । इस तरह से एरोल मस्क अपने बेटे के खिलाफ़ कोई न कोई कमेंट कर रहे है जिसकी वजह से वह अभी भी चर्चा में बने हुए है ।

6. नासा ने अपने साइंटिस्ट्स को यूएफओ साइटिंग की जानकारी इकट्ठा करने में लगा दिया है ताकि वह ऐसी ही रहस्यमय और थ्रिलिंग चीज़ों की खोज दूसरे प्लेनेट पर भी कर सकें 

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दोस्तों एक वक्त हुआ करता था जब यूएफओ साइटिंग ( UFO sightings )की न्यूज़ काफी ज्यादा रहस्यमय और थ्रिलिंग हुआ करती थी जैसे यहां यह चीज़ दिख गई वहां यह चीज़ दिख गई लेकिन अब यह लोगों को पहले की तरह अट्रैक्ट नहीं कर पा रही है । यहां तक कि यूएस गर्वनमेंट ने भी जितनी भी यूएफओ साइटिंग हुई थी वो सारी ही वीडियो पब्लिक के लिए रिलीज कर चुके हैं ।लेकिन अब लोगों को इसमें इतना ज्यादा इंटरेस्ट नहीं रहा जितना पहले हुआ करता था ।लेकिन अब नासा का इंटरेस्ट अभी तक जितने भी यूएफओ साइटिंग से एविडेंस कलेक्ट किए गए थे उनके ऊपर है और इन्होंने करीबन 15 से 16 साइंटिस्ट अपने इसी काम के ऊपर लगा रखे हैं ताकि एग्ज़िस्टिंग यूएफओ डेटा को आइडेंटिफाई ( identify ) किया जाए और यूएफओ से रिलेटेड अपनी अंडरस्टैंडिंग ( understandig) को और ज्यादा बढ़ाई जाए ।अब नासा इसके ऊपर काफी ज्यादा रिसर्च करके अपनी जानकारी को बढ़ा रही है इसके बाद वह दूसरे प्लेनेट पर भी अपनी यूएफओ की सर्चिंग करने वाले है कि क्या ऐसी मिस्टेरियस चीज़े सिर्फ इसी प्लेनेट पर होती है या फिर दूसरे प्लेनेट पर भी होती है इसी के ऊपर यह रिसर्च करने वाले है ।

7. चेन्नई एयरपोर्ट में स्लीपज़ो ने यात्रियों के लिए तैयार किया स्लीपिंग पॉड्स 

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दोस्तों इन्टरनेट के ऊपर आपने चीन और जापान के अंदर इस तरह के पॉड्स तो देखे ही होंगे। लेकिन अब चेन्नई के एयरपोर्ट के अंदर भी स्लीपज़ो ( Sleepzo ) ने इस तरीके के पोड्स लगा दिए हैं । दरअसल यह इस वजह से लगाए गए हैं क्योंकि जब लोग अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे होते हैं और उनको इंतजार करते करते घंटों समय बीत जाता है तब वह बहुत थक जाते है उनका लेटने का मन होता है , सोने का मन होता है , हो सकता है वह कही दूर से ट्रैवल करके आए हो तो इन सभी बातों का ध्यान में रखते हुए चेन्नई में स्लीपिंग पॉड ( sleeping pod ) लगाए गए हैं। कमरे के अंदर एक आरामदायक बैड , बुक्स रीड करने के लिए लाइट्स , चार्जिंग स्टेशन , एक यूएसबी चार्जर , लगेज रखने के लिए जगह , ब्लोअर कंट्रोल ( Blower Control ) ऐसी कई सारी फैसिलिटी मौजूद है। अगर कोई यहां पर जाकर आराम करना चाहता है तो वहां जाकर भी आराम कर सकता है इसके लिए इनको शायद एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ेंगे । इस रूम में एक बच्चा और एक अडल्ट आ सकता है यानी दो लोग आराम से सो सकते हैं।

8. ब्राज़ील में साइंटिस्ट ने चूहों के ऊपर शुगरी ड्रिंक का एक्सपेरिमेंट किया जिसके रिज़ल्ट सुनकर आप भी हैरान हो जाओगे 

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दोस्तों हममें से बहुत से लोग ऐसे हैं जोकि सोडा ड्रिंक , शुगरी ड्रिंक पीने के बहुत ज्यादा शौकीन होते है जैसे बाहर कही भी गए कभी कोक ले लिया , कभी पेप्सी ले लिया इसी तरह की कोई भी सॉफ्ट ड्रिंक ले ली और पीकर एन्जॉय करते हैं। लेकिन ब्राज़ील के अंदर इन्हीं शुगरी ड्रिंक के ऊपर एक्सपेरिमेंट भी किया गया है । ब्राज़ील के साइंटिस्ट ने चूहों के ऊपर इन शुगरी ड्रिंक्स को लेकर एक्सपेरिमेंट किया है । इसमें कई कैटेगरी के चूहे थे पहला चूहा एक साल का था , दूसरा आठ महीने का और तीसरा चूहा दो महीने का था ।इन तीनों को दो महीने तक सिर्फ यही शुगरी ड्रिंक पिलाते रहें जिसके बाद जो दो महीने वाला चूहा था और आठ महीने वाला चूहा था उसका दिमाग ही काम करना बंद कर चुका था तो वो बेसिकली पागल ही हो गए थे ।और एक साल वाले चूहे को कोई परेशानी नहीं हुई उसको तो शुगरी ड्रिंक पीने की आदत सी हो गई। जो दो महीने वाले और आठ महीने वाले चूहे थे उनके दिमाग पर इसका गहरा असर हुआ है । अब साइंटिस्ट का यह कहना है कि शायद इसका असर बच्चों पर भी पड़ता होगा और आजकल के छोटे बच्चे भी काफी ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक पीते है यानी की वह इन चीज़ों के बहुत ज्यादा एडिक्ट हो चुके हैं जिसकी वजह से वह जल्दी ही मोटापे के शिकार भी हो जाते है और दिमाग पर भी गलत असर पड़ता है जिसकी वजह से उनका दिमाग बाकी बच्चों जितना इंटेलीजेंट नहीं रहता होगा ।

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