2024 तक एप्पल का सी पोर्ट यूज़ होगा , अमेरिका लेबर क्राइसिस और ऐसी ही इंटरेस्टिंग न्यूज़

1. यूरोपियन यूनियन ने एक बिल पास किया है जिसमें कहा गया है कि 2024 तक सभी फोनों में होगा यूएसबी टाइप सी पोर्ट 

दोस्तों एप्पल वैसे तो कहता है कि हमें इस नेचर की काफी ज्यादा फिक्र है जिसकी वजह से अब हम आपको आईफोन के अंदर चाहे आप एक लाख का आईफोन लो या दो लाख का लो फिर भी हम आपको उसके साथ चार्जर और इयरफोन नहीं देंगे।यहां पर एक सवाल आता है कि फिर यूजर अपने आईफोन को चार्ज कैसे करेगा क्योंकि आईफोन ने अपने फोन के अंदर लाइटनिंग पोर्ट लगा रखा है जिससे दूसरी कंपनी के चार्जर हम यूज नहीं कर सकते।

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यूरोपियन यूनियन ने अब एक बिल पास कर दिया है कि 2024 तक जितने भी फोन यूरोप के अंदर बिकने के लिए आएंगे उन सभी के अंदर यूएसबी टाइप सी पोर्ट होना चाहिए। अब ज्यादतार एंड्रॉयड कंपनियों ने तो इस बात को मान भी लिया है और वह धीरे-धीरे करके टाइप सी पोर्ट के अंदर आते जा रहे है लेकिन एप्पल इस बात को मान नहीं पा रही क्योंकि एप्पल शुरूआत से ही इस मोबाइल मार्केट से अलग ही रही है।अब यूएस के अंदर भी यही कानून आने वाला है कि सभी फोनों के पोर्ट सेम होने चाहिए जिससे कि एक ही टाइप का चार्जर सभी फोनों में यूज हो सके।ऐसा इसीलिए किया जा रहा है ताकि ई-वेस्ट को कम किया जा सके क्योंकि अब ई-वेस्ट इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि प्लास्टिक की पहाड़ियां बन रही है। लेकिन हां 2024 में यह पक्का है कि आइफोन यूएसबी स्पोर्ट के साथ में ही आएगा।

2. इस साल के एंड तक इंडिया के 20 से 25 शहरों में होगा 5G नेटवर्क

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इस साल के अंत तक इंडिया के अंदर 20 से 25 शहर ऐसे होंगे जहां पर 5G नेटवर्क आ जाएगा और इसके प्राइस की बात की जाए तो यह 4G से एक्सपेंसिव होगा।लेकिन अगर ग्लोबली 5G के प्राइसेज से कंपेयर किया जाए तो यह सस्ता होगा।जब इंडिया के अंदर जियो आया था तब हमें 4G फ्री में यूज करने को मिल रहा था लेकिन अब 5G के लिए हमें पैसा देना होगा 4G से ज्यादा।

3. इंसान का स्वभाव है वह जहां भी जाता है कचरा जरूर फैलता है 

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दोस्तों इंसानों का फैलाया हुआ कचरा सारी दुनिया के अंदर ही मौजूद है आप किसी ऐसे आईलैंड में भी जा कर देख लो जहां पर इंसान कभी गया ना हो वहां पर भी इंसान का फैलाया हुआ कचरा मिल सकता है। यहां तक कि अब मार्स पर भी इंसान का कचरा फैला हुआ है दरअसल 2021 में जब पर्सिवियंस रोवर ( Perseverance Rover) लैंड कर रहा था तब उसका एक थर्मल ब्लैंकेट टूटकर मार्स पर गिर गया था जो अभी भी मार्स पर मौजूद है।इससे यह साबित होता है कि इंसान जहां भी जाएगा वहां पर कचरा जरूर करेगा। उदहारण के लिए आप केदारनाथ और माउन्ट एवरेस्ट को ले सकते हो।

4. एप्पल दुनिया की नंबर वन कम्पनी क्यों है?

दोस्तों एप्पल ने अपनी शुरुआत कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी से की थी और वह कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर भी बनाते थे लेकिन स्टीव जॉब्स ने जैसे ही आईफोन बनाया उसके बाद इस कंपनी ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज यह अपने आईफोन को चाहें दो लाख में भी बेचे दुनिया खरीदने के लिए तैयार हो जाती है इसीलिए यह अमेरिका की नंबर वन कंपनी बन चुकी है ।

5. इंटरनेट एक्सप्लोरर को हम ” फादर ऑफ ऑल ब्राउज़र ” कह सकते है इसी की वजह से हम दूसरे ब्राउजर को डाउनलोड कर पाए है।

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 दोस्तो माइक्रोसाफ्ट के इंटरनेट एक्सप्लोरर के सपोर्ट के खत्म होने के बाद में एक तरीके से इंटरनेट एक्सप्लोरर का अब अस्तित्व ही खत्म हो रहा है । सारी दुनिया को इसका थोड़ा सा अफसोस हुआ होगा लेकिन इतना नहीं हुआ होगा जितना साउथ कोरिया के दो भाइयों को हुआ है ।यह दोनों भाई साउथ कोरिया में कैफे चलाते थे इंटरनेट एक्सप्लोरर के जाने के बाद इन्होंने अपने कैफे के अंदर ही समाधि बना कर रख दी है। एक बात तो सही है कि इसको “फादर ऑफ ऑल ब्राउज़र “ भी कहा जा सकता है क्योंकि अगर यह ब्राउज़र ना होता तो कोई और ब्राउज़र डाउनलोड ना किया जाता। इसी की वजह से दूसरे ब्राउजर डाउनलोड हुए और उसके बाद में उनको हमने इंस्टॉल किया और उन्हें यूज करना शुरू किया ।

6. 2024 में अमेरिका के अंदर आने वाला है लेबर क्राइसिस 

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दोस्तों हमारे यहां पर जब जॉब की वैकेंसी निकलती है तो एक पोस्ट के लिए 10,000 लोग अप्लाई कर देते होंगे और कई बार हालात तो ऐसे हो जाते है कि किसी प्राईवेट कंपनी के अंदर व्यक्ति कम सैलरी पर भी काम करने के लिए तैयार हो जाता है बस किसी भी तरह से जॉब पर रख ले।क्योंकि इंडिया के अंदर जॉब कम है और लोग ज्यादा है लेकिन अमेरिका के अंदर इसका उल्टा है ।वहां पर जॉब्स ज्यादा होती है और करने वाले लोग बहुत कम होते है जिसकी वजह से 2024 में अमेरिका के अंदर लेबर क्राइसिस भी आने वाला है और एमेजॉन का तो एक मेमो भी लीक हो चुका है जहां पर कुछ ही महीनों में उनके साथ में यही चीज़े होने वाली है जिसमें उनको जितने एम्प्लॉय की जरूरत होंगी उतने एम्प्लॉय उनके पास में नहीं होंगे ।सिर्फ एमेजॉन के अंदर ही नहीं बल्कि अमेरिका के अंदर ऐसी बहुत सी कंपनी है जैसे वॉलमार्ट , टारगेट, फिनिक्स बहुत और कंपनियां है जहां पर इतनी वैकेंसी निकली हुई है अगर उन सभी को कंबाइंड कर दे तो शायद किसी कंट्री के अंदर उतनी पॉपुलेशन नहीं होगी। यह हालात चल रहे हैं जिसकी वजह से वहां पर सैलरी हाई रहती है । यहां पर हम बात कर रहे है D ग्रेड्स जॉब की जो लेबर टाईप की होती है शायद यहां पर बहुत से लोग पढ़े लिखे है जिसकी वजह से लेबर की जॉब वहां पर कोई करना नहीं चाहता।

7. PIM I से भी आप किसी की भी इमेज ढूंढ सकते हो

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दोस्तों कभी आपने इंटरनेट के ऊपर अपने आप को ढूंढने की कोशिश की है कि मेरी कितनी सारी इमेजेस इंटरनेट पर फैली हुई?अगर आपके पास किसी भी व्यक्ति की एक दो इमेजेस है और आपको उसकी बहुत सारी इमेजेस चाहिए तो आप कैसे ढूंढोगे? इसके लिए आप गूगल का यूज कर सकते हो लेकिन वह इतने तरीके से काम नही करता । इसी के साथ साथ आप क्लीयरव्यू एआई (Clearview AI) का भी यूज कर सकते हो लेकिन वह सोशल मीडिया से इमेजेस को फेच (fetch) नहीं कर पाता वह सिर्फ ब्लॉग और आर्टिकल से ही आपकी इमेज को निकाल पाता है और ब्लॉग आर्टिकल में आपकी इमेज कहां पर होगी ।

8. लेबर शॉर्टेज की वजह से अमेरिका ने किया मशीनरी रोबोट्स का यूज़

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दोस्तों दुनियाभर में कॉविड की वजह से बहुत सारे रिस्ट्रिक्शन लगे है हालांकि काफी देशों में यह रिस्ट्रिक्शन अब हट चुके है लेकिन चाइना के अंदर जो हो रहा है आपको मालूम हो होगा और अमेरिका के अंदर भी इसका गहरा असर पड़ा है कि उन्होंने अब रोबोट्स का यूज़ ज्यादा करना शुरू कर दिया। वहां पर अब रोबोट्स की सेल 40% बढ़ चुकी है क्योंकि वहां पर लेबर शॉर्टेज है और यह लेबर क्राइसिस काफी सालों से चल रहा है । वहां पर जॉब की वैकेंसी 11.5 मिलियन तक जा चुकी है लेकिन फिर भी वहां पर कोई जॉब करने को राजी नहीं है। वहा पर लोग बिना नौकरी किए कैसे कमाते है अभी तक लेकिन जॉब की वहां पर वैकेंसी बहुत है । लेबर शॉर्टेज की वजह से वहां पर मशीनरी रोबोट्स की सेल ज्यादा बढ़ चुकी है ।

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