नासा के ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने चंद्रमा की सरफेस को फ्लाईबाई किया , French Surgeons ने रचा इतिहास: 3D प्रिंटर के द्वारा नाक को किया ट्रांसप्लांट

1. FTX के सीईओ CEO Sam Bankman-Fried के बारे में एक बात का हुआ खुलासा

दोस्तों दुनिया की सेकेंड लार्जेस्ट क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज FTX हुआ करती थी लेकिन इसने खुद को बैंकरप्सी फाइल कर दिया है । FTX के सीईओ CEO Sam Bankman-Fried के बारे में एक बात पता चली है कि वह अपने स्टाफ को जिस रेस्टोरेंट में लेकर जाते थे वहां के रेस्टोरेंट के स्टाफ ने इस बात का खुलासा किया है कि Sam Bankman-Fried सिर्फ लंच में ही 2500 से 4000 यूएस डॉलर खर्च कर देते थे अपनेस्टाफ के ऊपर ।इनके साथ हमेशा 8 से 10 लोगों की टीम रहती थी और एक दिन में यह 10,000 यूएस डॉलर का खर्चा करते थे । यह पैसों का बहुत ज्यादा शो ऑफ करते थे और किसी ने सच ही कहा है जब पैसा आता है तो उसी स्पीड से चला भी जाता है तो इतना शो ऑफ करना भी जरूरी नहीं है।

2. नासा के ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने चंद्रमा की सरफेस को किया फ्लाईबाई

दोस्तों नासा के आर्टेमिस 1 मिशन में ओरियन स्पेसक्राफ्ट (Orion Spacecraft ) ने चंद्रमा को फ्लाईबाई ( flyby ) कर दिया है । यह एक वक्त में चंद्रमा की सरफेस से 130 किलोमीटर दूर हुआ करता था और यह चाहे तो इसको लैंड करवा सकते थे लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया । यह 11 दिसंबर को घूमकर वापस धरती पर आ जाएगा , फिलहाल के लिए गाइडेंस , नैविगेशन,कम्युनिकेशन पावर एंड थर्मल कंट्रोल के जितनी भी टैस्टिंग थी सब कर दी गई है।  अभी यह सिर्फ अनक्रू मिशन हुआ हैं लेकिन इसके बाद जो होगा वो क्रू मिशन होगा और उसमें आपको मून के ऊपर लैंडिंग भी देखने को मिलेगी । इस मिशन को देखकर तो यही लगता है कि अब वो दिन भी ज्यादा दूर नहीं है जब इंसान दुबारा से चंद्रमा पर कदम रखेंगे।

3. University of Connecticut के रिसर्चर्स ने बनाया एक सेरेब्रीक पेसमेकर जिसे ब्रेन में लगाया जा सकता है

दोस्तों University of Connecticut के रिसर्चर्स ने एक ऐसा सेरेब्रीक पेसमेकर ( cerebric pacemaker ) बनाया है जिसे ब्रेन में लगाया जाएगा । इसके अंदर बैटरी नहीं होगी बल्कि यह Lungs को चार्जर की तरह यूज़ करेगा जिससे कि यह ब्रेन की एक्टिविटी को रेगुलेट करता रहेगा और उसमें इलैक्ट्रिक पल्स भेजता रहेगा । दरअसल यह पार्किंसंस ( Parkinson ) वाले मरीजों के लिए बनाया गया है ताकि उनका दिमाग सही से काम करता रहे । हार्ट पेसमेकर जो हार्ट को रेग्यूलेट करता है वो भी कुछ इसी तरह से काम करता है जिससे रेगुलर हार्टबीट डिटेक्ट हो जाती हैं ।इन दोनों पेसमेकर में बैटरी का यूज किया जाता है लेकिन अब इन्होंने एक ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप कर दी है जिससे कि Lungs को बैटरी की तरह यूज़ किया जा सकता है ।

4. Jio और Airtel के 5G Network का रोलआउट शुरू हो चुका है

दोस्तों आपमें से कुछ लोग शायद ऐसे होंगे जिन्होंने 5G Network को एक्सपीरियंस कर लिया होगा क्योंकि कुछ शहरों के अंदर Jio और Airtel के 5G Network का रोलआउटशुरू हो चुका है  लेकिन VI को इसमें टाइम लगेगा । इस वक्त लोगों से इंतजार नहीं हो रहा हैजिसकी वजह से अब वह Airtel और Jio में कन्वर्ट हो रहे है । इस तरह से VI के सब्सक्राइबर घटते चले जा रहे है और दूसरी ओर Airtel और Jio के सब्सक्राइबर काफी तेजी से बढ़ते चले जा रहे है । लेकिन अगर आपका फोन 4G है तो आप 5G नेटवर्क का एंजॉय नहीं कर सकते तो सबसे पहले आप यह चेक कीजिए कि क्या आपका फोन 5G कंपैटिबल है ।

5. French Surgeons ने रचा इतिहास: 3D प्रिंटर के द्वारा नाक को ट्रांसप्लांट किया

दोस्तों French Surgeons ने एक इतिहास बना दिया हैं। दरअसल एक महिला ने कैंसर की वजह से अपनी नाक का एक हिस्सा खो दिया था लेकिन अब इसने एक 3D नाक लगवा ली है । इस महिला ने 3D प्रिंटर के द्वारा अपने हाथ में एक नाक डिवेलप किया और यह धीरे-धीरे ग्रो होने लगा । जब यह नाक बड़ी हो गई तो इसे काटकर उसके फेस में ट्रांसप्लांट कर दिया गया और अब यह महिला नाक के साथ हैं। यहां पर क्या होता है कि अगर किसी दूसरे इंसान की नाक ली जाए या फिर अगर कोई इंसान इस दुनिया से चला जाता है तो उसके कई सारे ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। इसी तरह से नाक को भी ट्रांसप्लांट किया जा सकता था लेकिन वो थोड़ी सी अलग लगती थी और रिजेक्शन का भी खतरा रहता है और फिर सारी जिंदगी दवाइयां खानी पड़ती है। लेकिन इस केस में इसी महिला के मसल्स सैल्स लिए गए थे और इसी से 3D प्रिंटेड नाक तैयार करके इसको लगाया गया था ताकि वो ग्रो होती रहे और बॉडी भी उस नाक को एक्सेप्ट कर लें। जब बॉडी ने इस नाक को एक्सेप्ट किया तो उसको ट्रांसप्लांट किया गया ।

6 साउथ कोरिया में Smartphone Addicts के लिए ट्रैफिक लाइट लगाई गई

दोस्तों आपने स्मार्टफोन के एडिक्ट्स तो हर जगह देखे होंगे लेकिन यह आपके लिए सही नहीं है । ऐसे लोग जब भी कही जाते है तो उनका ध्यान सिर्फ और सिर्फ मोबाइल फोन में रहता है और यहां तक कि वो रोड क्रॉस करते टाइम भी ध्यान नहीं देते । इसी वज़ह से साउथ कोरिया ने रोड के नीचे भी रेड लाइट और ग्रीन लाइट सिग्नल्स लगा दी है जिससे कि लोगों को पता चल जाए कि रेड लाइट हो रही है । इस तरह से साउथ कोरिया ने स्मार्ट प्रॉबलम का स्मार्ट सोल्यूशन निकाला ।

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