जिंदगी में आप अपनी तुलना किसी से ना करें ?

जिंदगी में आप अपनी तुलना किसी से मत कीजिए क्योंकि जब कोई इंसान खुद की तुलना दूसरों के साथ करता है तो हमें हमेशा दूसरों की खूबियां ज्यादा दिखाई देती है, और अपनी खूबियां कम लगने लगती है। बहुत से लोग अपनी इस आदत को अपनी कमजोरी समझ बैठते हैं और हमेशा खुद ही अपनी तुलना दूसरों के साथ करने लगते है । यह प्रक्रिया आज से नही बल्कि सदियों से चली आ रही है हम लोग सोचते हैं कि दूसरे के पास अगर कोई चीज है तो वह हमारे पास भी होनी चाहिए दूसरे के पास बंगला गाड़ी है तो हमारे पास भी होना चाहिए ।

जिंदगी में आप अपनी तुलना किसी से मत कीजिए क्योंकि जब कोई इंसान खुद की तुलना दूसरों के साथ करता है तो हमें हमेशा दूसरों की खूबियां ज्यादा दिखाई देती है, और अपनी खूबियां कम लगने लगती है। बहुत से लोग अपनी इस आदत को अपनी कमजोरी समझ बैठते हैं और हमेशा खुद ही अपनी तुलना दूसरों के साथ करने लगते है । यह प्रक्रिया आज से नही बल्कि सदियों से चली आ रही है हम लोग सोचते हैं कि दूसरे के पास अगर कोई चीज है तो वह हमारे पास भी होनी चाहिए दूसरे के पास बंगला गाड़ी है तो हमारे पास भी होना चाहिए ।

अगर हम इस तुलना को गलत तरीके से करते हैं तो हम स्वयं को दूसरों से छोटा या कम समझने लगते हैं । जब हम दूसरों से तुलना करते हैं कैसे उसके पास बड़ा घर है , मैं भी लूंगा। ये दुनिया में एक जलन की भावना कहलाती है जो हमे कमजोर और असहाय का अनुभव करवाती है। जब आप अपने बारे में कुछ सोचे बिना सिर्फ अपनी कमियो को सोच कर परेशान रहते हैं तो इसका मतलब आप गलत रास्ते पर जा रहे हैं ।और यह हमारी कमजोरी होती है ।

1) कैसे हम अपने नजरिए को बदले :

कई बार तो हमारी जिंदगी में ऐसा वक्त आता है कि हमारे अच्छे हालात नहीं रहते हैं ।हम चाह कर भी अपने हालातों को नहीं बदल सकते हैं ऐसे में हमें एक ही चीज के बारे में सोचते रहते हैं कि वह हम अपने नजरिए को केसे बदले जब आप अपने नजरिए को बदलने की सोच रखेंगे तब आप अपने हालातों को सामना कर पाएंगे और समझ पाएंगे सबसे पहले आप यह सोचना बंद करें कि ऐसा होता तो , क्या होता है, या फिर ऐसा ना होता तो क्या होता हैं? आप अपने दिमाग में ऐसे विचार को ना रखें। जैसे: बहुत से लोगों के पास सब कुछ होता है वह फिर भी औरों को देख कर सोचते हैं कि यह सब भी मेरे पास होता आप ऐसी बाते सोच कर दूसरों को परेशान नहीं करते बल्कि खुद को परेशान करते हैं इसीलिए आपको अपनी सोच और नजरिए को बदलने की जरूरत होती है। आपको भगवान ने जितना भी दिया है उसी में खुश रहना सीखो जब आप अपने नजरिए में बदलाव ला सकोगे तभी आप अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं।

2 ) अपनी सोच को बदलो :

अगर आपको अपने जीवन में कुछ बदलाव लाना है तो अपनी सोच को बदलो जीवन में हमें कुछ भी हासिल करने के लिए सबसे पहले ये जरूरी है कि हम किया सोचते है तो हमें अपनी सोच बदलना बहुत ही जरूरी है । हमारे जीवन में कई समस्या आती है हम दुखी हो जाते हैं हम जिसके बारे में ज्यादा सोचने लग जाते हैं कि ऐसा क्यों हुआ ? यह नहीं होना चाहिए था? हमारे जीवन में जो भी हो रहा है अगर हमें उसे बदलना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें अपनी सोच पर ध्यान देना जरूरी है। कोई भी इंसान अपनी सोच बदलने की कोशिश नहीं करता दुनिया में 90 % लोग ऐसे हैं जो अपनी आदतों को बदलने की सोच रखते हैं । कहीं लोग तो वहीं के वहीं रहते हैं वह लोग यह समझ नहीं पाते हैं ऐसा हमारे साथ क्यों हो रहा है जब हम कुछ करना चाहते हैं तो और उसमे हम असफल हो जाते हैं। हम उस असफलता का कारण दूसरों को देते हैं और जब हम उसका कारण दूसरों को मानते हैं तो हम खुद को बदलने या सुधारने के अवसर खो देते हैं लेकिन हम भूल जाते हैं कि असफलता का कारण यह लोग नहीं बल्कि हम ही हैं इसीलिए हमें दूसरों के प्रति अपनी सोच को बदलनी है.

3)तुलना करने की आदत :


दूसरों से अपनी तुलना करना यह इंसान की जीवन की सबसे बड़ी कमजोरी होती है। हर इंसान के अंदर कुछ कमजोरियां होती है और कुछ अच्छाई भी होती है यह हम में से अधिकतर लोग दूसरों से अपनी तुलना करके दुखी रहते हैं , तुलना करना ही अधिकतर समस्याओं का जड़ है।

4)खुद का व्यवहार बदले:

हर कोई इंसान अपना व्यवहार बदलना चाहता है चाहे आप हो या कोई भी आप चाहे तो खुद को बदलने की कोशिश कर सकते हैं । हमारा व्यवहार ही हमें यह सिखाता है कि हम कैसे हैं ? और कैसी सोच रखते हैं? हमें कभी भी अपनी अकड़ से नहीं रहना चाहिए हमारी अकड़ हमें एक ना एक दिन झुका ही देती है । और हमें अपनी अकड़ के सामने झुकना ही पड़ता है आप अपना व्यवहार ऐसा बनाकर रखें जिससे आपको किसी के सामने झुकना ना पड़े ,जैसे कि हम खुद को बदलते हैं वैसे ही समय के साथ साथ हमारा व्यवहार भी बदलता रहता है हम कैसे बात करते हैं ? हम कैसी सोच रखते हैं ?या हमें कैसे दूसरों का ख्याल रखना चाहिए ?अगर हम कहीं जा रहे हैं और कोई व्यक्ति हमसे बात करना चाहता है और हम उसकी बात को अनसुना कर देते हैं तो यह हमारा व्यवहार कहलाता है कि हम दूसरों से कैसे पेश आते हैं।

निष्कर्ष

अगर हम दूसरे लोगों के साथ अपनी तुलना करने लगते हैं तो हम अपने आत्मसम्मान को कम कर देते हैं, और हमें बुरा लगने लगता है , हम किसी से अपनी तुलना करने से कैसे रोक सकते हैं सबसे पहले हमें अपने नजरिए को बदलने की कोशिश करनी चाहिए कि आप खुद को किस नजरिए से देखते हैं इसके लिए पहले हमें अपने विचारों को जानने की कोशिश करनी चाहिए।

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