क्यों एप्पल चीन को छोड़ नहीं सकता ?

दोस्तों अक्सर चीन से एक न्यूज़ बार-बार आती हैं कि चीन में कोरोना के केसेस फिर से बढ़ रहे है जिसे देखते हुए चीन गवर्नमेंट ने दुबारा से Zero-Covid Policy लागू कर दिया हैं । अभी हाल में एक न्यूज़ सामने आ रही थी कि लॉकडाउन लगने की वजह से चीन में एप्पल की प्रोडक्शन कम हो रही है इसीलिए एप्पल अब चीन को छोड़ना चाहता हैं और दूसरे देशों की तरफ जाना चाहता है ।अब वह इंडिया , वियतनाम और दूसरे देशों की तरफ बढ़ेगा ताकि वो ज्यादा से ज्यादा आईफोन की प्रॉडक्शन कर सकें । आप सभी को मालूम होगा कि चीन में आईफोन की प्रॉडक्शन  फॉक्सकॉन फैक्ट्री ( Foxconn Factory ) के अंदर की जाती है लेकिन अभी चीन में जिस तरह के हालात चल रहे हैं उससे आईफोन की प्रॉडक्शन पर भी असर पड़ रहा है और वहां पर इसकी प्रोडक्शन कम हो चुकी है और इसी वजह से एप्पल अब चीन से अपनी डिपेंडेंसी को कम करना चाहता हैं ।

क्या एप्पल चीन को छोड़ सकता हैं ?

दोस्तों इसका सिंपल सा जवाब है नहीं । Apple , Adidas , Nike और Walmart इन सभी के पास कई सारे प्रॉडक्ट्स है और अपने सभी प्रॉडक्ट की Outsourcing यह चीन से ही करते हैं। यहां पर Apple 75% , Adidas 25% , Nike 46% और Walmart 70% प्रोडक्ट्स की आउटसोर्सिंग करते है ।बहुत सी बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं जो हर बार यही कहती है कि हम चीन को छोड़ देंगे क्योंकि चीन में बहुत सी Government Policies है जैसे _ डिस्क्रिमिनेशन को लेकर , फोर्स लेबर को लेकर आदि । आपको क्या लगता है यह कंपनियां चीन को छोड़ सकते हैं ? इसका जवाब है नहीं क्योंकि चीन में काम करना इनके लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है । इंटरनली चीन के अंदर कुछ भी चलता रहे , कितने ही इश्यू क्यों ना हो जाए , इंटरनल वॉर चलती रहे लेकिन अगर बिज़नेस के Point of view से देखा जाए तो इन बड़ी-बड़ी कंपनी के लिए चीन एक गोल्ड माइन है , जहां से यह अपने प्रोडक्ट्स बनवाते हैं और फिर दूसरे देशों में जाकर सेल करते है। अगर 2022 की ही स्टडी को देखे तो शुरुआत के 4 महीनों के अंदर ही चीन में 26% FDI हुई थी और यह करीबन 74 बिलियन यूएस डॉलर की थी ।

अभी रिसेंटली अक्टूबर महीने में भी एक सर्वे हुआ है जहां 370 कंपनियों के कुछ एम्प्लॉयज से बात की गई थी कि क्या वो चीन को छोड़ सकते है या नहीं? यहां पर 25% लोगों ने ” Yes ” और 75% लोगों ने ” No ” में जवाब दिया था । जिन लोगों ने Yes में जवाब दिया था उनका कहना था कि चीन एक ऐसी जगह है जहां उनका काम बहुत तेजी के साथ होता है और बहुत सस्ते में हो जाता है तो यहां पर बहुत सी कम्पनियां कन्फ्यूज रहती है चाइनीज पॉलिसी को लेकर लेकिन वो चीन को बिल्कुल भी छोड़ना नहीं चाहते है । For example_अगर Starbucks को देखा जाए तो  Covid- 19 के वक्त में जब हर जगह सबका काम ठप्प पड़ा था तब चीन के अंदर Starbucks का बिज़नेस बहुत अच्छे से हो रहा था । अगर starbucks यह सोचता कि चीन की वजह से वायरस फैल रहा है तो हमें भी चीन को छोड़ देना चाहिए तो यह एक बहुत बड़ा रिस्क हो सकता था तो चीन में रहकर ही Starbucks ने ऐसा बिजनेस किया जो शायद वो USA में रहकर भी नहीं कर पाता । अगर कोई कंपनी चीन में लॉन्ग टर्म बिजनेस करना चाहती हैं तो काफी ज्यादा बेनिफिट हो सकता है और इसी को देखते हुए Starbucks ने चीन में अपनी इनवेस्टमेंट को भी बढ़ा दिया है और यहां पर इनके 6000 से भी ज्यादा Outlet मौजूद है ।

अभी आपने सुना होगा कि एप्पल ने कहा था कि वो चीन से अपनी डिपेंडेंसी कम करना चाहता है इसीलिए वो भी चीन को छोड़ देगा । एप्पल अब इंडिया , वियतनाम और दूसरे देशों की तरफ जाएगा जहां पर वो अपनी प्रोडक्शन को बढ़ा सके। लेकिन हमें ऐसा लगता है कि यह सिर्फ़ कहने की बात है ताकि चीन के ऊपर प्रेशर बनाया जा सके । आपने देखा होगा कि एप्पल की प्रॉडक्शन बढ़ाने के लिए अब चाइनीज गवर्नमेंट ने वहां के एक्स सर्विसमैन को भी काम पर लगा दिया है ताकि किसी भी हालत में एप्पल की प्रॉडक्शन कम नहीं होनी चाहिए तो वहां पर काफी ज्यादा प्रेशर डाला जा रहा है । अगर आप 2021 से इसे कंपेयर करते हो तो इस बार इन्होंने 25% प्रॉडक्शन ज्यादा करी है , ना कि इनकी प्रॉडक्शन कम हुई है । इस डाटा से हमें यह पता चलता है कि बेशक से चीन के अंदर Zero-Covid Policy लागू है और कई सारे प्रोटेस्ट चल रहे है फिर भी एप्पल की प्रोडक्शन पर कोई फर्क नहीं पड़ा है बल्कि इनकी प्रॉडक्शन बढ़ी हैं ।


क्यों यह बड़ी-बड़ी कम्पनियां चीन को चाहकर भी छोड़ नहीं पा रही हैं ? दोस्तों हम सभी को मालूम है कि चीन के अंदर लेबर बहुत ज्यादा सस्ती हैं और इसी बात का फायदा यह कम्पनियां उठाती है और इनके पास वर्कफोर्स इतनी ज्यादा है जिससे इनका काम बड़ी तेजी के साथ होता है । चीन के अंदर जितनी भी मैन्युफैक्चरिंग कम्पनियां है कोई भी लॉ गाइडलाइंस को फॉलो नहीं करता , यहां पर सिर्फ फोर्स लेबर और चाइल्ड लेबर का ही हिसाब रखा जाता है । एनवायरनमेंट का ख़्याल रखना तो दूर की बात है बल्कि यहां पर हैल्थ और सेफ्टी का भी बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता हैं ।

आपको मालूम होगा कि जब पिछले साल चीन में लॉकडॉउन लगा था तब बहुत से वर्कर्स को फैक्टरी के अंदर ही लॉक कर दिया गया था और कहा गया कि आप अपने घर नहीं जा सकते है और आपको इसी फैक्ट्री में रहकर काम करना होगा तो चीन के अंदर इस तरह की भी सिचुएशन आ जाती है । चीन में लेबर की शिफ्ट भी काफी ज्यादा लंबी होती है और इनका कोई Insurance भी नही होता जिसकी वजह से यहां पर बहुत सस्ते लेबर मिल जाते हैं तो इस तरह से इन कम्पनियों का प्रॉफिट मार्जिन भी काफ़ी ज्यादा बढ़ जाता हैं। यहां पर चीन बहुत से ऑफर देता है और इसी के साथ-साथ चीन एक Ready to Sale Market भी है क्योंकि यह दुनिया की सबसे पॉपुलेटेड कंट्री है , यह चीन के अंदर ही प्रॉडक्ट बनाकर वही पर सेल करते है और अपने पड़ोसी देशों में भी सेल करते हैं ।

अगर सिर्फ चीन के अंदर एप्पल के प्रॉडक्ट्स की बात की जाए तो सिर्फ अक्टूबर महीने में ही चीन के अंदर जितने भी फोन सेल हुए थे उसमें से हर चौथा फोन सिर्फ आईफोन था और आईफोन 14 सीरीज ने तो वहां सारे रिकॉर्ड ब्रेक कर दिए है और वहां पर वह बेस्ट सेलिंग फोन रहा है। अगर हम बाकी ब्रांड्स की बात करें जैसे _ BMW , Tesla , Walmart , Intel तो ये बड़ी-बड़ी कम्पनियां चीन में प्रॉडक्ट्स बनाकर चीन के अंदर ही सेल करते हैं और दूसरे देशों में तो यह अलग रेट पर प्रॉडक्ट सेल करते हैं जिससे इन्हें काफी ज्यादा प्रॉफिट भी होता है । अगर प्रॉफिट मार्जिन की बात की जाए तो शायद कोई भी कम्पनी चीन को नहीं छोड़ना चाहती और यह सिर्फ़ कहने की बात है ताकि चीन के ऊपर प्रेशर डाला जा सके ।

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