एलोन मस्क के न्यूराकिंक ब्रेन कम्प्यूटर को कंपटीशन दे रही है ब्रेन कम्प्यूटर स्टार्टअप कंपनी सिंक्रोन , जिसको अब FDA यूएस के 6 ह्यूमन ट्रायल की भी अनुमति दे दी है 

1. एलोन मस्क के न्यूराकिंक ब्रेन कम्प्यूटर को कंपटीशन दे रही है ब्रेन कम्प्यूटर स्टार्टअप कंपनी सिंक्रोन , जिसको अब FDA यूएस के 6 ह्यूमन ट्रायल की भी अनुमति दे दी है 

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दोस्तों एलोन मस्क के न्यूरालिंक ने अब तक बहुत से वादें किए है लेकिन अभी तक वह कोई भी वादा समय पर पूरा नहीं कर पाए है। लेकिन यही पर ब्रेन कम्प्यूटर स्टार्टअप और न्यूरालिंक प्रतिद्वंद्वी, सिंक्रोन नाम की कंपनी ने 1.5 इंच का एक डिवाइस तैयार किया है जो कि पैरलाइज्ड पेशेंट के दिमाग में लगाया जाता है और इन्होंने 6 जुलाई को न्यूयॉर्क के एक पेशेंट में इसको इंप्लांट भी कर दिया है ।दरअसल यह डिवाइस पैरालाइज पेशेंट की सोच को टेक्स्ट में कन्वर्ट करता है । अभी तक यह ऑस्ट्रेलिया के चार पेशेंट्स को इंप्लाट कर दिया गया है जिससे कि यह इनको सोच को टेक्स्ट में कन्वर्ट कर देता है । इसी के साथ साथ अब यह व्हाट्सएप पर भी बात कर सकते है और ऑनलाइन शॉपिंग भी कर सकते है। अब FDA ( Federal Drug Administration ) ने इसको यूएस के 6 ह्यूमन ट्रायल की भी अनुमति दे दी है । 

2. यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी के रिसर्चर्स ने एक ऐसे पूल की खोज की है जिसके अंदर जाते ही तत्काल आपकी मौत हो सकती हैं 

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दोस्तों यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी ( University of Miami ) के रिसर्चर्स ने एक ब्राइन पूल की खोज की है जो काफी ज्यादा बड़ा है। यह पूल रेड सी ( Red Sea ) के अंदर पाया गया है लेकिन यहां पर इसकी एक खास बात है कि इसके अंदर जो भी जाएगा वह या तो पैरालाइज हो जाएगा या फिर मर जाएगा क्योंकि इसका पानी आसपास के महासागर की तुलना में लगभग तीन से आठ गुना अधिक खारा होता है।

 इसी के साथ-साथ इसके अंदर सलाइन का लेवल भी काफी ज्यादा है और यह इस पृथ्वी की सबसे ज्यादा एक्सट्रीम एनवायरमेंट वाली जगह है जहां पर कोई भी तैर नहीं सकता। इसी तरह के और भी पूल है जैसे गल्फ ऑफ मैक्सिको , मेडिटेरियन सी, रेड सी के अंदर भी अब पाया गया है काफी ज्यादा डेंजर पूल हैं क्योंकि यहां पर कोई भी लाइफ सरवाइव कर ही नहीं सकती जो इस पुल के अंदर गया वह वापस जिंदा नहीं आ सकता ।

3. इंडिया में Google Pixel 6A इतना एक्सपेंसिव क्यों है ?

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दोस्तों गूगल पिक्सेल 6A के बारे में आप सभी को पता होगा और अब यह 28 जुलाई को इंडिया के अंदर भी आने वाला है। लेकिन इंडिया के अंदर इसकी कीमत ₹44000 है और यह इतना ज्यादा एक्सपेंसिव इसीलिए है क्योंकि इनको बाहर से इंपोर्ट किया गया है जिसके कारण इसके ऊपर इंपोर्ट ड्यूटी लगाया जाता है और जब आप इस फोन को खरीदोगे तो इसके ऊपर जीएसटी लगाया जाता है जिसकी वजह से यह इतना ज्यादा एक्सपेंसिव हो जाते है वरना यूएसए में इस फोन की कीमत ₹35000 है।

4. इंग्लैंड में पार्सल को हवा में फेंककर किया गया डिलीवर्ड 

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दोस्तों यूके के अंदर शायद अब इसी तरह की डिलीवरी चलती है कि पार्सल फेंको और फिर चले जाओ।आपने हाल ही में एक किस्सा सुना होगा जिसमें एक महिला ने पार्सल को दरवाजे के ऊपर से ही अंदर फेंक दिया था जिसकी वजह से ps5 भी टूट गया था । यही पर इंग्लैंड के अंदर सेम इसी तरह से एक और डिलीवरी हुई है ।दरअसल जो डिलीवरी बॉय था उसने पैकेट हवा में उछाल दिया और उसके बाद में उस पैकेट की पिक्चर ले ली कि वो सही जगह पर डिलीवर्ड हो चुका है । जिस व्यक्ति का वह पैकेट था वह घर पर नहीं था जिसकी वजह से इसने पार्सल हवा में फेंक दिया और उसके बाद में उसकी फोटो ली कंफर्म करने के लिए कि पैकेट डिलीवर कर दिया गया है और इसको अप्रूवल भी मिल गया और इसका पैकेज डिलीवर्ड हो गया और जिस व्यक्ति को यह पार्सल देना था उसको भी इस चीज से कोई दिक्कत नहीं हुई उसने तो बड़ी खुशी खुशी कहा कि मेरा पार्सल डिलीवर्ड हो चुका है और इसने ट्विटर पर इसकी फोटो भी शेयर करी।

5. कार्बन कैप्चरिंग प्लांट : ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए यूएसए में स्टार्ट किया गया है एक नया कॉन्सेप्ट 

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दोस्तों ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए बहुत से ऐसे प्लांट सेटअप किए गए है जिसमें से एक है कार्बन कैप्चरिंग प्लांट। इसमें बड़े-बड़े पंखे लगे होते हैं और वह हवा को अपनी तरफ खींचते हैं जिसकी वजह से वह साफ हवा बाहर फेंकते है और उसके बाद में उसमें कार्बन को कैप्चर कर लेते हैं। यह प्लांट उन जगहों पर ज्यादा लगना चाहिए जहां पर इंडस्ट्री बहुत ज्यादा है ।लेकिन सेम इसी तरह का तो नहीं बल्कि इसी से मिलता जुलता प्रोजेक्ट अब नॉर्थ अमेरिका के रेलवे ट्रैक पर स्टार्ट होने वाला है जिसे कार्बन कैप्चरिंग इंजन और कार्बन कैप्चरिंग ट्रेन के नाम से भी जाना जाएगा। यह यूएसए के रेलवे ट्रैक पर चलेगा और यह करीबन 6000 टन कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर कर सकती है। अगर इसे सभी ट्रेनों में मास स्केल पर लगाया जाए तो 1 साल के अंदर ही काफी ज्यादा हेल्प करेगी ।

 इसी तरह का कॉन्सेप्ट अब एक कार स्टार्टअप कम्पनी भी कर रही है जोकि इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाती है और यह 20,000 किलोमीटर चलने के बाद में सिर्फ 2 किलो कार्बन को कैप्चर करती है ।

6. मेटा ने किया ट्रेडमार्क वायलेशन,इसको बहुत जल्द किया जा सकता है स्यू

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दोस्तों फेसबुक पहले व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की पैरेंटल कंपनी हुआ करती थी लेकिन अक्टूबर 2021 से फेसबुक की भी एक पैरेंटल कंपनी आ गई है मेटा और उसी के अंदर अब व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम भी आ गए है। मेटा नाम एक meta.is नाम की एक कम्पनी का था और 2017 में मेटा इनके साथ पार्टनरशिप भी करना चाह रहे थे लेकिन meta.is ने मना कर दिया । इसके बावजूद भी इन्होंने मेटा नाम ले लिया अब meta.is का कहना है कि उन्होंने इनका नाम चुराकर ट्रेडमार्क वायलेशन ( Trademark Violation ) किया है जिसकी वजह से अब वह मेटा को स्यू ( Sue ) करने के लिए कोर्ट में जा रहे हैं ।दरअसल इस meta.is कंपनी ने पूरे 12 साल लगाएं है इस नाम और कंपनी को बनाने में लेकिन अचानक से एक बड़ी कंपनी आती है और उनका नाम चुरा लेती है तो कैसा लगेगा? अब आप एप्पल का लोगो ही ले लीजिए अगर उसकी नकल किसी और फ्रूट के साथ में भी की जाती है तो एप्पल वहां पर उंगली उठाने शुरू कर देता है कि यह गलत है यह हमारे टरडेमार्क का वायलेशन है लेकिन यहां पर meta.is का नाम सीधा ही उठा लिया गया है वो भी बिना उनकी परमीशन के।

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