आर्टेमिस 1 मून मिशन

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दोस्तों हम सभी को आर्टेमिस 1 मून मिशन ( Artemis 1 Moon Mission ) का बेसब्री से इंतजार है कि नासा इस मिशन को कब लॉन्च करेगा । पहली बार इसे 29 सितंबर को लॉन्च किया जाना था लेकिन उस समय इसके SLS रॉकेट के अंदर RS-25 नाम का एक इंजन है उसमें टेमरेचर का इश्यू आ गया था जिसकी वजह से इस मिशन को वही रोकना पड़ा ।नासा की टीम के बीच एक बार फिर से मीटिंग हुई जिसमें यह फैसला किया गया कि 3 सितंबर को इस मिशन को लॉन्च किया जाएगा लेकिन फिर से एक समस्या और आ गई कि इसके फ्यूल टैंक में लीकेज होने की वजह से इस मिशन को फिर से वही पर रोक दिया गया । अभी भी आर्टेमिस 1 मून मिशन अपने लॉन्चपैड पर ही है हर बार लॉचिंग के टाइम कोई ना कोई प्रॉब्लम आ जाती है जिस वजह से इस मिशन को वही पर ही रोक दिया जाता है । 

दोस्तों नासा का बरसों से चांद पर जाने का सपना रहा है और वह अपनी एक गलती की वजह से अपनी कई सालों की मेहनत को खराब होने नहीं दे सकता इसीलिए हर बार जब इस मिशन की लॉन्चिंग के टाइम कोई प्रॉबलम आ जाती है तो इस मिशन को वही पर ही रोक दिया जाता है और इस मिशन की लॉन्चिंग के लिए अगली तारीख दे दी जाती है । नासा ने इस मिशन के लिए 50 सालों से भी ज्यादा इंतजार किया है तो थोड़ा इंतजार और सही ।

इस मिशन को लॉन्च करने में इतना समय क्यों लग रहा है ?

दोस्तों इस मिशन को करने में करीबन 60 साल का समय लग गया लेकिन अब इस मिशन में इतना समय क्यों लग रहा है । हम मानते है कि पहले टेक्नोलॉजी इतना ज्यादा एडवांस नहीं थी लेकिन अब क्या कारण है ? आज से 50 साल पहले नासा जिस कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती थी अब तो उससे भी पावरफुल स्मार्टफोन हर इंसान के पास है ।मानते हैं नासा अभी अपने इस मिशन में एस्ट्रोनॉट्स को नहीं भेज रहे हैं लेकिन फिर भी वह मून पर ऐसे स्पेस क्राफ्ट को भेजेंगे जो मून को ऑर्बिट करेगा । इसके अलावा आपको इस मिशन में बहुत ही कमाल की चीजें भी देखने को मिलेगी _ 

1 ) डमीज ( Dummies ) – 

आपको ऐसी डम्मी देखने के मिलेगी जो बिल्कुल ही इंसान की तरह होंगे जैसे किसी इंसान के ऊपर रेडिएशन का क्या असर होता है इस तरीके की टेस्टिंग अब इन डम्मी के ऊपर की जाएगी ।

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2 ) ओरियन स्पेसक्राफ्ट ( Orion Spacecraft ) – 

यह एक बहुत ही बड़ा कैप्सूल होगा जिसके अंदर स्नूपी टॉय ( Snoopy Toy ) होंगे जो जीरो ग्रैविटी को टेस्ट करेगा।अब आप लोगों के दिमाग में यह सवाल आ रहा होगा कि यह टेस्ट तो डम्मी से भी हो जाएगा फिर स्नूपी टॉय को अलग से क्यों भेजा जा रहा है ? दरअसल डम्मी से यह टेस्ट नहीं हो पाएगा क्योंकि यहां पर डम्मी को सीट बेल्ट बांधकर रखा जाएगा और इस पर एस्ट्रोनॉट्स वाले सारे टेस्ट होंगे।लेकिन जीरो ग्रैविटी के लिए सिर्फ स्नूपी टॉय ही काम करेंगे क्योंकि इसे नासा विजुअली देख भी सकता है यह मून पर किस तरह से काम करता है ।

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हालांकि इस मिशन में एस्ट्रोनॉट्स नहीं जा रहे लेकिन फिर भी इसके अंदर ऐसी बहुत सी सवालों का जवाब ढूंढा जाएगा कि एक असली एस्ट्रोनॉट्स के ऊपर इसका क्या इफैक्ट पड़ सकता है ? इस स्नूपी डोल के अंदर कई चीजे डाली गई है जो किसी एस्ट्रोनॉट के जाने पर भी होंगी जैसे कि सर्विस मॉड्यूल , लाइफ सपोर्ट , वॉटर , ऑक्सीजन , नाइट्रोजन , फुड सप्लाई ऐसी बहुत सी चीजें होंगी ।

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इस मिशन के लिए इजराइल स्पेस एजेंसी , नासा और बोईंग स्पेस कुछ ऐसे बीज ( seeds ) भेज रहे है जो इस मिशन के कंपलीट होने के बाद इनसे लिया जाएगा और इसका इस्तेमाल एजुकेशन के लिए किया जाएगा जिसमें यह सारे बीज स्कूल में डिस्ट्रीब्यूट किए जायेंगे ।

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 इस मिशन में यूरोपियन स्पेस एजेंसी अपने ग्रीक गॉडेस थ्रीडी प्रिंटेड स्टैच्यू भेजेंगे जिसे इस मिशन को कंपलीट होने के बाद ग्रीस के एक म्यूजियम में डिसप्ले किया जाएगा ।

यह सारा का सारा मिशन यूएसए का है तो इसमें यूएसए पीछे कैसे हट सकता है । इस मिशन में यूएसए का झंडा भी भेजा जाएगा और नासा का एक बहुत ही बड़ा मेडल होता है जिसकों सिल्वर स्नूपीपिन्स भी कहा जाता है इसको भी मून पर भेजा जाएगा ऐसी बहुत सी चीज़े है जिसे इस मिशन के दौरान भेजी जाएंगी।

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