अपने हुनर को कैसे पहचाने ?

अपने हुनर को कैसे पहचाने ? क्या हैं यह हुनर (talent) ?कैसे हम हुनर के बल पर अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं । हुनर एक प्रतिभा हैं, एक गुण है , एक कौशल है, जो हर इंसान में पाया जाता हैं। बस यह है कि किसी का हुनर छिप जाता है और किसी का हुनर छप जाता हैं।

दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं हुनर (प्रतिभा )के बारे में। हमारे जीवन में हुनर का इतना महत्व क्यों है ?हर व्यक्ति में कोई ना कोई हुनर जरूर छुपा होता है, हमें बस उसे पहचानने की जरूरत है ।ऐसे लोग अपने अंदर के हुनर को जानने की कोशिश नहीं करते हैं और जीवन में वह मुकाम हासिल नहीं कर पाते हैं जिसके वह असली हकदार होते हैं । इसीलिए सबसे पहले खुद को जानने की कोशिश करें क्योंकि जब आप खुद को जान लेते हैं तो आपका हुनर भी धीरे-धीरे आपके सामने आने लगता है जिससे आपका जीवन आसान हो जाता है और आपके जीवन की लगभग सारी उलझनें समाप्त हो जाती हैं।

kisi pe depend mat raho..

खुद को पहचानना तब मुश्किल हो जाता है जब हमारे अंदर सिर्फ नकारात्मक विचार( negative thoughts) रहते हैं या फिर हमारे अंदर डर होता है और तब हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है । ऐसी परिस्थिति में इंसान अपनी जिंदगी से संतुष्ट नहीं होता । और अगर कोई इंसान अपनी जिंदगी से संतुष्ट नहीं है और उसका आत्मविश्वास कम है या उसके अंदर सिर्फ नकारात्मक विचार है तो ऐसे समय में वह इंसान खुद को जानने की कोशिश करता है ।जब इंसान अपने जीवन में हर चीज से असंतुष्ट रहता है तो वह खुद को जानने की कोशिश करता है – मैं कौन हूं ?

मेरे अंदर ऐसी कौन सी प्रतिभा है जो औरों में नहीं है ? मैं अपने जीवन को कैसे संतुष्ट कर सकता हूं? काफी सारे सवाल उसके मन में चल रहे होते हैं। ऐसे में अगर इंसान एकांत में रहकर खुद के बारे में जाने ,खुद को समय दे ,खुद से बातें करें तो वह काफी हद तक खुद को जान लेता है ।धीरे-धीरे उसके अंदर का हुनर उसके सामने आने लगता है और वह अपने जीवन को संतुष्ट कर सकता है और अपने जीवन में ऐसा मुकाम हासिल कर सकता है जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।

अपने हुनर को कैसे पहचाने ?

1) अगर आप कोई काम करते हैं और उस काम को करते समय आप उस काम में इतने मग्न हो जाते हैं कि आपको समय का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं रहता है। और उस काम को करने के बाद भी आपमें एक नई ऊर्जा बनी रहती है , आप बिल्कुल भी थकावट महसूस नहीं करते हैं तो समझ लीजिए वही आपके अंदर का हुनर है ।
हमारे अंदर किसी भी तरह का हुनर हो सकता है जैसे एक्टर, सिंगर ,कॉमेडियन ,डांसर ,लेखक इत्यादि। बस हमें यह कोशिश करनी है कि हम समय रहते अपने हुनर को पहचाने। क्योंकि इसी हुनर के बल पर ही हम अपने जीवन में नाम, शोहरत और धन कमा सकते हैं।

2) अगर आप अपनी जिंदगी से खुश नहीं है या फिर आपका आत्मविश्वास डगमगा रहा है तो इसका अर्थ यह है कि आप अंदर से बहुत कमजोर है। ऐसे समय में आपको सबसे पहले अपनी कमियों को जानना है ।जब आप अपने अंदर की कमियों को जान लेते हैं तो आपके लिए अपने हुनर को जानना आसान हो जाता हैं।
उदाहरण के लिए – हो सकता है आप लोगों से अच्छे से बात नहीं कर पाते हो जिस कारण से आपका आत्मविश्वास कम हो जाता हैं । आपके अंदर एक डर रहता है कि लोग क्या कहेंगे? दुनिया क्या कहेगी ? इस डर से आप अपने जीवन में कुछ नया नहीं कर पाते हैं और खुद को यह तसल्ली देते हैं कि सब अच्छा है। खुद को झूठी तसल्ली देने से अच्छा है आप अपने हुनर को जानने के लिए जीवन में नई नई चीजें करें ।खुद को इस कदर तराशे कि आपका हुनर ही आपको इस दुनिया में एक अलग पहचान दिलाए।

3) अपने हुनर को जानने के लिए सबसे पहले एक लिस्ट बनाइए।आपको क्या करना पसंद है ?और आप क्या कर सकते हैं ? लिस्ट बनाने के लिए आप अपने माता-पिता या फिर शुभचिंतकों की मदद भी ले सकते हैं। इस लिस्ट को बनाने में थोड़ा समय लगेगा , पर आप इसे पूरा पूरा समय दीजिए ।
जब आपकी पूरी लिस्ट तैयार हो जाए तो उसे ध्यान से पढ़े और उसे अपने दैनिक जीवन में लागू करें। इसी लिस्ट में आपका हुनर भी छुपा हुआ है

4) आप खुद से सवाल पूछ कर भी अपने हुनर को जान सकते हैं ।खुद से कुछ ऐसे सवाल पूछे जो अपको यह सोचने के लिए मजबूर कर दे कि आपमें ऐसा क्या है जो और लोगों में नहीं है।
उदाहरण के लिए – (1)आप कौन हैं ?क्या कर सकते हैं?
(2) दुनिया आपके बारे में क्या सोचती है ?इससे आपको क्यों फर्क पड़ता है?
(3) बुरे समय में क्या यह दुनिया आपका साथ देगी?
(4) अगर मैं किसी की मदद करता हूं तो मेरे में ऐसी कौन सी अच्छाई हैं?
(5) कौन मेरी परवाह करता है और क्यों?

इस तरह के सवाल खुद से बार-बार करे । यही सवाल आपको यह सोचने के लिए मजबूर कर देंगे कि आपमें कौन-कौन सी अच्छाई है और कौन कौन सी बुराई है? यही सवाल आपके अंदर एक नई ऊर्जा पैदा करेंगी और आपमें एक नया उत्साह और आत्म बल पैदा होगा।

5) कभी भी खुद की तुलना दूसरों से ना करें क्योंकि भगवान ने भी हम सभी को एक दूसरे से बिल्कुल अलग बनाया है। जैसे कोई व्यक्ति एक जैसे कार्य को अलग अलग तरीके से करता है । जैसे एक व्यक्ति उस काम को जल्दी करता है और दूसरा व्यक्ति उसी काम को देर में करता है । हर व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए कभी भी खुद की तुलना औरों से मत कीजिए क्योंकि जो काम आप कर सकते हैं वो काम सामने वाला व्यक्ति नहीं कर सकता। हर इंसान के अंदर एक जैसा हुनर नहीं होता। बस आप इतना जान लीजिए कि हर इंसान में कुछ ना कुछ खास हुनर जरुर होता है।

निष्कर्ष ( conclusion)


इस तरह से हमने जाना कि हुनर क्या है ?कैसे हम अपने अंदर के हुनर को जान सकते हैं? कैसे हम अपने हुनर के बल पर इस दुनिया में एक मुकाम हासिल कर सकते हैं? कैसे हम अपने हुनर के बल पर जीवन को सरल बना सकते हैं ?अगर साफ शब्दों में कहा जाए तो बिना हुनर के इंसान का इस दुनिया में कोई अस्तित्व नहीं है। कई बार हम मेहनत नहीं करते बल्कि अपनी किस्मत को दोष देते हैं ।मेरी किस्मत अच्छी नहीं है ।भगवान मेरे से गुस्सा है इसीलिए मेरे साथ सब कुछ गलत हो रहा है।

भगवान कभी भी किसी के साथ अन्याय नहीं करता। इस दुनिया में जन्म लेने वाले हर इंसान के अंदर कोई ना कोई हुनर जरूर होता है, बस कोई समय से पहले अपने हुनर को जान लेता है और कुछ लोग पूरी जिंदगी लगाकर भी अपने अंदर के हुनर को ढूंढ़ नहीं पाते ।कहते हैं कि “किसी का हुनर छुप जाता है और किसी का हुनर छप जाता हैं ” । इसीलिए आप सबसे पहले अपने अंदर के हुनर को खोजें ,खुद को जानने की कोशिश करें ।जब आपको आपने अंदर का हुनर पता चल जाएगा तब आप खुद को ऐसे मुकाम पर पाएंगे जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।

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